भारत की सबसे युवा राष्ट्रीय पार्टियों में से एक, Aam Aadmi Party की राजनीति अप्रैल 2026 में उस समय हिल गई जब Raghav Chadha और पार्टी नेतृत्व के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद खुलकर सामने आ गया। कभी Arvind Kejriwal की राजनीति के “चहेते” माने जाने वाले चड्ढा को अचानक अहम पदों से हटाए जाने के बाद आरोपों और जवाबी आरोपों की बाढ़ आ गई। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद की असल सच्चाई।
संस्थागत अलगाव (Institutional Divorce)
2 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी ने औपचारिक रूप से राज्यसभा सचिवालय से अनुरोध किया कि राघव चड्ढा की जगह Ashok Kumar Mittal को उपनेता बनाया जाए। इससे भी बड़ा कदम यह था कि पार्टी ने चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न देने की मांग की, जिससे उनकी आवाज लगभग पूरी तरह दबा दी गई।
हालांकि पार्टी ने इसे “रूटीन प्रक्रिया” बताया, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने इसे “अनुशासनहीनता” और पार्टी एजेंडे से भटकाव का मामला बताया।
AAP के तीन मुख्य आरोप
पार्टी नेतृत्व, जिसमें Saurabh Bharadwaj और Anurag Dhanda शामिल हैं, ने तीन बड़े आरोप लगाए:
1. पंजाब के हितों की अनदेखी
पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema और प्रदेश अध्यक्ष Aman Arora ने आरोप लगाया कि चड्ढा ने पंजाब के मुद्दों को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि ₹8,500 करोड़ के ग्रामीण विकास फंड और ₹1,600 करोड़ की बाढ़ राहत जैसे अहम मुद्दों को उन्होंने संसद में नहीं उठाया।
2. संघर्ष की बजाय ब्रांडिंग पर ध्यान
पार्टी नेताओं ने चड्ढा पर “सॉफ्ट पीआर” करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब पार्टी लोकतंत्र के लिए लड़ रही थी, तब चड्ढा एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे की कीमत और मोबाइल डेटा जैसे मुद्दों पर बात कर रहे थे।
3. वैचारिक समझौता (Ideological Compromise)
पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann समेत कई नेताओं ने चड्ढा को “समझौता करने वाला” बताया। आरोप है कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए और विपक्ष के वॉकआउट में शामिल नहीं हुए।
गंभीर आरोप: आर्थिक और शारीरिक दुर्व्यवहार
विवाद तब और गहरा हो गया जब पूर्व AAP नेता Naveen Jaihind ने चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह विवाद आर्थिक गड़बड़ी से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली और पंजाब से इकट्ठा किया गया पैसा लंदन भेजा गया।
सबसे गंभीर आरोप यह था कि चड्ढा के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया—उन्हें “मुर्गा” बनाकर पीटा गया, जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री आवास और चंडीगढ़ के एक गुप्त स्थान पर हुआ।
राघव चड्ढा का जवाब
राघव चड्ढा ने इन सभी आरोपों को “सुनियोजित साजिश” बताया। उन्होंने “Three Allegations, Zero Truth” नाम से वीडियो जारी कर पार्टी को चुनौती दी कि वे वॉकआउट से गैरहाजिरी के सबूत पेश करें।
उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा आम आदमी के मुद्दों – जैसे GST, स्वास्थ्य सेवाएं और गिग वर्कर्स के अधिकार, को उठाया है, जो एक सांसद की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अपने जवाब के अंत में उन्होंने फिल्मी अंदाज में कहा:
“घायल हूं, इसलिए घातक हूं।”
निष्कर्ष: एक बड़ा मोड़
फिलहाल राघव चड्ढा पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्य बने हुए हैं, लेकिन उनकी प्रभावशाली भूमिका लगभग खत्म कर दी गई है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद पार्टी से निष्कासन तक पहुंचता है या चड्ढा किसी नए राजनीतिक विकल्प की ओर बढ़ते हैं।
अब तक जो “सच्चाई” सामने आई है, वह Aam Aadmi Party के अंदर विश्वास के पूरी तरह टूटने की तस्वीर दिखाती है।




